Wednesday, July 2, 2014

राइट टू रिकॉल


देश में 'राइट टू रिकॉल' की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि अवाम को अपनी ग़लती के लिए पांच साल पछताना न पड़े. 'राइट टू रिकॉल' यानी जनप्रतिनिधियों को कार्यकाल के बीच में ही वापस बुलाने का अधिकार. यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें आम आदमी को नियत प्रक्रिया के तहत अपने ऐसे प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार है, जिनके काम से वह संतुष्ट नहीं है. अमेरिका, स्विटज़रलैंड, वेनेज़ुएला और कनाडा आदि देशों में 'राइट टू रिकॉल' क़ानून लागू है. महंगाई की मार से त्रस्त देश की जनता को शिद्दत से इसकी ज़रूरत महसूस हो रही है, ताकि अपनी ग़लती का ख़ामियाज़ा उसे पांच साल न भुगतना पड़े...
-फ़िरदौस ख़ान

1 Comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन पूँजी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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