Monday, September 28, 2009

भारत से नफ़रत करते हैं चीन के कुछ बाशिंदे

यह अफ़सोस की बात है कि... भारत और चीन के बीच जंग हुए क़रीब 47 साल बीतने के बावजूद वहां के बाशिंदे आज भी भारत को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं...हालांकि इन तल्खियों का का दावा करते हुए ब्रिटिश अखबार संडे टाइम्स ने यह भी बताया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में शामिल लोगों की अपने मुल्क के प्रति निष्ठा कम हो रही है...

एक अक्टूबर को चीन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर लिखे अखबार के एक लेख में कहा गया है, ‘बीजिंग में हर कोई अपने विदेश मंत्रालय की तरह रेशमी जुबान नहीं बोलता है. वहां ज्यादातर जिस दुश्मन की बात होती है, वह भारत ही होता है.’ रिपोर्ट के मुताबिक चीन में सेंसर के बावजूद तिब्बत के पठार को बचाने के लिए भारत के साथ जंग के मुद्दे के नफ़ा-नुक़सान के मुख्तलिफ को लेकर इंटरनेट पर बेबाक चर्चा की इजाज़त दी जा रही है.

इतना ही नहीं, चीनी सेना में भ्रष्टाचार की बातें भी खुलकर होने लगी हैं. पीएलए के जानकार लोगों का कहना है कि कई बरसों से जंग का सामना न करने से चीनी सेना में भ्रष्टाचार फैल गया है. वे बताते हैं कि सैनिक बनने के लिए 10 हजार युआन (70 हजार रुपए) से लेकर सैन्य कॉलेज में भर्ती के लिए 30 हजार युआन (2.10 लाख रुपए) तक की रिश्वत देने की भ्रष्ट व्यवस्था काम कर रही है. इस मुद्दे पर स्तंभकार जनरल झांग शुतियान के हवाले से अखबार ने लिखा है- ‘अगर सेना में भ्रष्टाचार ऐसे ही क़ायम रहा तो उसूल मर जाएंगे और रिश्वत के ज़रिये तरक्की देने की इस प्रवृत्ति से सैनिकों में बगावत होने लगेगी.

चीन में गणराज्य की स्थापना की 60 वीं वर्षगांठ के मौके पर अखबार ने अपने लेख में लिखा है कि इस मौके पर आधुनिक चीन के इतिहास की सबसे भव्य परेड देखी जा सकती है. परेड में नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों, टैंकों और राइफलों के प्रदर्शन का दर्शन होगा.

अलबत्ता, इसे चीन का शक्ति प्रदर्शन कहना ग़लत न होगा...

1 Comments:

hindwaarta said...

Aapki Coverage Bahut Soochnaparak Hai. Badhaai Sweekaaren !!

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