Wednesday, October 8, 2008

पाक कश्मीर की आज़ादी के खिलाफ़ नहीं

आख़िर पाकिस्तान ने कश्मीरियों के बारे में अपना रुख़ साफ़ कर ही दिया। ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चयुक्त वाजिद शम्सुल हसन ने कश्मीर पर कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर में 'बाहर के चरमपंथियों के आतंकवाद' के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कश्मीरियों के भारत के विरुद्ध बल प्रयोग को उचित ठहराया है. गौरतलब है कि श्री हसन हाल में देश के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए उस इंटरव्यू के बारे में स्पष्टीकरण दे रहे थे, जिसमें उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर में इस्लामी चरमपंथियों को 'आतंकवादी' कहा था.


क़ाबिले-गौर यह भी है कि राष्ट्रपति ज़रदारी के विचारों के बारे में छपी रिपोर्ट के बाद प्रदर्शनकारियों ने भारत प्रशासित कश्मीर में जारी कर्फ़्यू की अवहेलना करते हुए भारतीय प्रशासन और ज़रदारी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए थे। कश्मीर में ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान के किसी नेता के पुतले जलाए गए हैं। आमतौर भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय प्रशासन का विरोध करते समय पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगते रहे हैं.


प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने ज़रदारी के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि " ज़रदारी ने अमरीका को ख़ुश करने के लिए यह बयान दिया है। ज़रदारी भारत से डरते हैं और भारत को ख़ुश करने के लिए पाकिस्तान की प्रतिष्ठा से भी समझौता कर सकते हैं।'' उनका यह भी कहना है कि ''कश्मीरी युवा अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं। सच तो यह है कि कश्मीर की जनता सरकारी आतंकवाद का आतंक का शिकार है। कश्मीरी के विद्रोहियों को आतंकवादी कह देने से कश्मीर की स्वायत्ता और स्वतंत्रता का आंदोलन कमज़ोर पड़ने वाला नहीं है. चरमपंथी संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन के प्रमुख कमांडर मुश्ताक़ ज़रगार ने भी ज़रदारी के बयान की आलोचना करते हुए कहा था कि "ज़रदारी ने भारत को कश्मीरी युवाओं को क़त्ल करने का लाइसेंस दे दिया है."


पाक उच्चायुक्त का कहना था कि राष्ट्रपति ज़रदारी 'कश्मीरी बाशिंदों के अपने संघर्ष को और स्वशासन के अधिकार' को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। मीडिया को भेजे गए एक ई-मेल में उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान विदेशी चरमपंथियों की ओर से सीमापार घुसपैठ और कश्मीरियों की आज़ादी की मुहिम को नेस्तनाबूद किए जाने' के ख़िलाफ़ है। ई-मेल में यह भी कहा गया है कि- 'इन विदेशी चरमपंथियों ने कश्मीरियों के स्वतंत्रता के संघर्ष की मदद करने की जगह उसे नुक़सान पहुंचाया है।'


गौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने के बाद संसद को अपने पहले संबोधन में आसिफ़ अली ज़रदारी ने कश्मीर का ज़िक्र करते हुए कहा था कि- ''मूल अधिकारों की बहाली को लेकर कश्मीरी लोगों के न्यायसंगत संघर्ष के प्रति हम वचनबद्ध हैं।''

3 Comments:

मौसम said...

बेहतरीन तहरीर है...आज हिन्दुस्तान के जो हालात हैं, उसके लिए हुकूमत ही ज़िम्मेदार है... हैरानी की बात तो यह भी है कि अपनी पुराणी गलतियों से सबक़ लेने कि बजाय फिर नई गलतियां की जा रही हैं...

योगेन्द्र मौदगिल said...

ये अपने कहे पर टिके रहें तब की बात..
बहरहाल..
आमीन....................

nakul said...

पाकिस्तान में सिधिंयों के ऊपर बहुत दमन हुआ है जीये सिंध के आंदोलन को विस्तात मिलना चाहिये

क्या ये पाकिस्तान सिंध की आजादी के खिलाफ़ हैं?

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