Thursday, September 4, 2008

कोसी ने क़हर तो अपनों ने ज़ुल्म ढहाया


फ़िरदौस ख़ान
बिहार में कोसी नदी ने जो क़हर बरपाया है, वह पहले ही कम नहीं था...और अब अपने ही लोग बाढ़ पीड़ितों पर ज़ुल्म ढहा रहे हैं...हालांकि बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव सहायता मुहैया कराने के दावे कर रही है, लेकिन कोसी के पानी में डूबे इस प्रदेश से आ रही ख़बरों कुछ और ही बयां कर रही हैं...
राहत शिविरों में लोगों को भोजन के नाम पर ख़राब खिचड़ी दी जा रही है...बीमार होने के डर से लोग उसे हाथ तक नहीं लगा रहे हैं...लोगों का कहना है कि अगर उन्हें सड़ा खाना खिलाकर ही मारना था तो पानी से ही क्यों निकाला, वहीं छोड़ दिया होता मरने के लिए...
इतना ही नहीं अभी भी कितने ही इलाकों में राहत नहीं पहुंच पाई है... बाढ़ पीड़ितों को वक़्त पर इलाज भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे कितने ही लोग मौत के मुंह में समा गए हैं.....सहरसा के नागो शर्मा की भी कहानी भी बाढ़ पीड़ितों की तकलीफ़ों को बयां करने के लिए काफ़ी है... में उसने छत पर मां को लिटा लिया... उसकी सत्तर वर्षीया मां भगीनिया देवी मां भूख से बेहाल रही...घर में खाने को कुछ नहीं था...सब कोसी की भेंट चढ़ गया था...हर तरफ़ बस पानी ही पानी नज़र आ रहा था...राहत की उम्मीद में राहत की उम्मीद में उसकी आंखें पथरा गईं, लेकिन कहीं से उसे कोई मदद नहीं मिली...आखिरकार वह अपनी मां को कंधे पर लेकर अस्पताल तो पहुंच जाता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है... डॉक्टरों ने उसकी सत्तर वर्षीया मां को मृत घोषित कर दिया...वह डॉक्टरों से लाख मिन्नतें करता रहा कि एक बार उसकी मां को ठीक से देख लो, लेकिन डॉक्टरों यह कहकर उसे निकल दिया कल देखेंगे...
फिर नागो शर्मा को लेकर कुछ लोग स्थानीय थाने पर पहुंचा, ताकि पूरे मामले की एफ़आईआर दर्ज कराई जाए.लेकिन थानेदार का रवैया भी डॉक्टरों से कहीं ज़्यादा तल्ख़ था. उसने शव को मॉर्चुरी में रखने की व्यवस्था कराने में आनाकानी की. जब उससे पूछा गया कि पुलिस शव की सुरक्षा के लिए कुछ क्यों नहीं कर सकती तो उसका जवाब था कि अस्पताल की मॉर्चुरी में तो शव को कुत्ते नोच डालेंगे, इससे बेहतर हुआ कि वह बाहर ही पड़ा रहा...
पुलिस को नहीं आना था और वह नहीं आई... किसी तरह लोगों के सहयोग से नागो की मां के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई...यह हैं हमारे देश के डॉक्टर और पुलिस...
नागो शर्मा के साथ जो हुआ वह किसी के भी साथ हो सकता है... इसलिए ज़रूरत है अवाम को जागने की और सरकार को जगाने की...

2 Comments:

मौसम said...

आज इंसानियत ख़त्म होती जा रही है...इसलिए ही इतनी सारी मुश्किलात पैदा हो गईं हैं...

Udan Tashtari said...

अफसोसजनक स्थितियाँ....

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